जब व्यापार करने के लिए नहीं

हर व्यक्ति कि नया व्यापार करने पर यही आशा रहती है कि उसका व्यापार खूब चले. परंतु सबको सफलता नहीं मिलती है कई बार बहुत से लोगो को व्यापार में घाटा और बहुत सी अड़चनों के कारण जल्दी ही अपना व्यापार बंद करना पड़ता है !ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह सामान्यता अशुभ मुहूर्त में कार्य आरम्भ करने के कारण होता है. इसलिए जब व्यापार करने के लिए नहीं बेहतर यही है कि जब भी नया व्यापार करना हो तो उस समय मुहुर्त पर अच्छी तरह विचार कर लें . मुहुर्त जब शुभ हो तभी व्यापार करें अन्यथा शुभ मुहुर्त के आने की प्रतीक्षा करें.

1 दुकान खोलने के लिए जब आप मुहुर्त निकालें उस समय तिथि का भी विचार भी अवश्य करना चाहिए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुकान खोलने के लिए सभी तिथि शुभ हैं परंतु रिक्ता तिथि यानी (चतुर्थ, नवम व चतुर्दशी) में में दुकान खोलने से बचना चाहिए.

2 नन्दा तिथियों एवं प्रतिपदा , षष्ठी और एकादशी तिथि के दिन नवीन योजना पर कार्य शुरू नहीं करना चाहिए.

3 नए व्यापार शुरू करने के लिए कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस तक ) कि तिथि का त्याग करने में ही बुद्धिमानी है इसके लिए शुक्ल पक्ष (अमावस के अगले दिन से पूर्णिमा तक ) कि तिथियाँ ज्यादा शुभ होती है.

4 नए व्यापार दुकान खोलने में मंगलवार को बिलकुल भी त्याग देना चाहिए . मंगलवार के अलावा आप किसी भी दिन दुकान खोल सकते हैं.

5 अमावस का दिन भी नए व्यापार कि शुरुआत के लिए शुभ नहीं है . 13 तारीख तथा यदि व्यक्ति के पिता कि मृत्यु हो चुकी है तो उनकी मृत्यु कि तिथि का भी त्याग कर देना चाहिए .

6 भद्रा में भी नया काम बिलकुल भी नहीं करना चाहिए .

7 हमेशा ध्यान दें कि कोई भी एग्रीमेंट कभी भी रविवार, मंगलवार या शनिवार को नहीं करना चाहिये.

8 असफलता से बचने के लिए जन्म राशि से चौथी, आठवीं और बारहवीं राशि पर जब चंद्र हो उस समय नया काम शुरू नहीं करना चाहिए.

9 शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, द्वादशी एवं त्रयोदशी तिथि व्यापार के लिए बहुत शुभ मानी गयी है. इन तिथियों को व्यापार शुरू करने से मनवाँछित सफलता मिलने के योग प्रबल रहते है .

10 बुधवार के दिन उधार देना व मंगलवार को उधार लेना मुहूर्त की दृष्टि से कतई भी शुभ नहीं माना गया है.

11 युग तिथियां - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग व कलियुग जिन तिथियों को ये युग आरम्भ हुए थे उन दिनों में भी कोई शुभ कार्य नहीं करने चाहियें. ये इस प्रकार से हैं :-

सतयुग - कार्तिक शुक्लपक्ष की नवमी,

त्रेतायुग - बैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया ,.

द्वापरयुग - माघ कृष्णपक्ष की अमावस्या,

कलियुग - श्रावण कृष्णपक्ष त्रयोदशी.

किसी भी नए व्यापार जब व्यापार करने के लिए नहीं में सफलता के लिए नीचे दिए गए उपायों को अपनाने से शीघ्र मनचाही सफलता प्राप्त होती है .

12 नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए 6 मुखी रुद्राक्ष चांदी के साथ धारण करें .

13 नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए गुरुवार को श्री विष्णु भगवान का व्रत रखें व किसी भी विष्णु मंदिर में मीठा प्रसाद चड़ाकर उसका वितरण करें.

14 नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए पंच धातुओं की विभिन्न वस्तुऐं किसी भी जरूरतमंद को दान करें.

15 नया व्यापार शुरू करने वाले व्यक्ति अपने व्यापार में सफलता के लिए काले घोड़े की नाल दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनें.

मेक इन इंडिया

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भारतीय अर्थव्यवस्था देश में मजबूत विकास और व्यापार के समग्र दृष्टिकोण में सुधार और निवेश के संकेत के साथ आशावादी रुप से बढ़ रही है । सरकार के नये प्रयासों एवं पहलों की मदद से निर्माण क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है । निर्माण को बढ़ावा देने एवं संवर्धन के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितम्बर 2014 को 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम की शुरुआत की जिससे भारत को महत्वपूर्ण निवेश एवं निर्माण, संरचना तथा अभिनव प्रयोगों के वैश्विक केंद्र के रुप में बदला जा सके।

'मेक इन इंडिया' मुख्यत: निर्माण क्षेत्र पर केंद्रित है लेकिन इसका उद्देश्य देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना भी है। इसका दृष्टिकोण निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना, आधुनिक और कुशल बुनियादी संरचना, विदेशी निवेश के लिए नये क्षेत्रों को खोलना और सरकार एवं उद्योग के बीच एक साझेदारी का निर्माण करना है।

'मेक इन इंडिया' पहल के संबंध में देश एवं विदेशों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। अभियान के शुरु होने के समय से इसकी वेबसाईट पर बारह हजार से अधिक सवाल इनवेस्ट इंडिया के निवेशक सुविधा प्रकोष्ठ द्वारा प्राप्त किया गया है। जापान, चीन, फ्रांस और जब व्यापार करने के लिए नहीं दक्षिण कोरिया जैसे देशों नें विभिन्न औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारत में निवेश करने हेतु अपना समर्थन दिखाया है। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निम्नलिखित पचीस क्षेत्रों - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है की पहचान की गई है:

चुनौतियों का सामना

सरकार ने भारत में व्यवसाय करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाये हैं। कई नियमों एवं प्रक्रियाओं को सरल जब व्यापार करने के लिए नहीं बनाया गया है एवं कई वस्तुओं को लाइसेंस की जरुरतों से हटाया गया है।

सरकार का लक्ष्य देश में संस्थाओं के साथ-साथ अपेक्षित सुविधाओं के विकास द्वारा व्यापार के लिए मजबूत बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार व्यापार संस्थाओं के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक गलियारों और स्मार्ट सिटी का विकास करना चाहती है। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडो में खुलती है के माध्यम से कुशल मानव शक्ति प्रदान करने के प्रयास किये जा रहे हैं। पेटेंट एवं ट्रेडमार्क पंजीकरण प्रक्रिया के बेहतर प्रबंधन के माध्यम से अभिनव प्रयोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कुछ प्रमुख क्षेत्रों को अब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोल दिया गया है। रक्षा क्षेत्र में नीति को उदार बनाया गया है और एफडीआई की सीमा को 26% से 49% तक बढ़ाया गया है। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के लिए रक्षा क्षेत्र में 100% एफडीआई को अनुमति दी गई है। रेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निर्माण, संचालन और रखरखाव में स्वचालित मार्ग के तहत 100% एफडीआई की अनुमति दी गई जब व्यापार करने के लिए नहीं है। बीमा और चिकित्सा उपकरणों के लिए उदारीकरण मानदंडों को भी मंजूरी दी गई है।

29 दिसंबर 2014 को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद उद्योग से संबंधित मंत्रालय प्रत्येक क्षेत्र के विशिष्ट लक्ष्यों पर काम कर रहे हैं। इस पहल के तहत प्रत्येक मंत्रालय ने अगले एक एवं तीन साल के लिए कार्यवाही योजना की पहचान की है।

कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' निवेशकों और उनकी उम्मीदों से संबंधित भारत में एक व्यवहारगत बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। 'इनवेस्ट इंडिया' में एक निवेशक सुविधा प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। नये निवेशकों को सहायता प्रदान करने के लिए एक अनुभवी दल भी निवेशक सुविधा प्रकोष्ठ में उपलब्ध है।

निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लक्ष्य

  • मध्यम अवधि में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में प्रति वर्ष 12-14% वृद्धि करने का उद्देश्य
  • 2022 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी में 16% से 25% की वृद्धि
  • विनिर्माण क्षेत्र में वर्ष 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना
  • समावेशी विकास के लिए ग्रामीण प्रवासियों और शहरी गरीबों के बीच उचित कौशल का निर्माण
  • घरेलू मूल्य संवर्धन और निर्माण में तकनीकी गहराई में वृद्धि
  • भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
  • विशेष रूप से पर्यावरण के संबंध में विकास की स्थिरता सुनिश्चित करना

आर्थिक विकास के आगे की दिशा

  • भारत ने अपनी उपस्थिति दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप दर्ज करायी है
  • 2020 तक इसे दुनिया की शीर्ष तीन विकास अर्थव्यवस्थाओं और शीर्ष तीन निर्माण स्थलों में गिने जाने की उम्मीद है
  • अगले 2-3 दशकों के लिए अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभांश। गुणवत्तापूर्ण कर्मचारियों की निरंतर उपलब्धता।
  • जनशक्ति की लागत अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है
  • विश्वसनीयता और व्यावसायिकता के साथ संचालित जिम्मेदार व्यावसायिक घराने
  • घरेलू बाजार में मजबूत उपभोक्तावाद
  • शीर्ष वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों द्वारा समर्थित मजबूत तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षमतायें
  • विदेशी निवेशकों के लिए खुले अच्छी तरह विनियमित और स्थिर वित्तीय बाजार

भारत में परेशानी मुक्त व्यापार

'मेक इन इंडिया' इंडिया' एक क्रांतिकारी विचार है जिसने निवेश एवं नवाचार को बढ़ावा देने, बौद्धिक संपदा की रक्षा करने और देश में विश्व स्तरीय विनिर्माण बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए प्रमुख नई पहलों की शुरूआत की है। इस पहल नें भारत में कारोबार करने की पूरी प्रक्रिया को आसान बना दिया है। नयी डी-लाइसेंसिंग और ढील के उपायों से जटिलता को कम करने और समग्र प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता काफी बढ़ी हैं।

अब जब व्यापार करने की बात आती है तो भारत काफी कुछ प्रदान करता है। अब यह ऐसे सभी निवेशकों के लिए आसान और पारदर्शी प्रणाली प्रदान करता है जो स्थिर अर्थव्यवस्था और आकर्षक व्यवसाय के अवसरों की तलाश कर रहे हैं। भारत में निवेश करने के लिए यह सही समय है जब यह देश सभी को विकास और समृद्धि के मामले में बहुत कुछ प्रदान कर रहा है।

व्यापार का प्रमाण पत्र

कुछ नियम और कानून हैं जो आपको कुछ भी और सब कुछ स्थापित करते समय पालन करने की आवश्यकता है। ये नियम और कानून आपको अपने काम के लिए एक मजबूत आधार बनाने में मदद करते हैं। किसी भी कानूनी उपक्रम से निपटने के दौरान ये नियम विशेष रूप से अनिवार्य हैं। इसी तरह, जब आप अपना व्यवसाय स्थापित करते हैं, तो आपको सरकार द्वारा निर्धारित कुछ नियमों और विनियमों का पालन करने की आवश्यकता होती है। यह आपकी इकाई को एक कानूनी पहचान देता है और साथ ही आपको अन्य लाभ भी प्रदान करता है। व्यवसाय के पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्राप्त करना उन चरणों में से एक है जो आपको अपने व्यवसाय को पंजीकृत करने और चलाने के जब व्यापार करने के लिए नहीं बीच पालन करने की आवश्यकता है। कंपनी अधिनियम, 2015 पेश होने तक यह एक अनिवार्य कदम था। अधिनियम ने अब इस प्रमाणपत्र के होने की पिछली अनिवार्यता को हटा दिया है। अब, यह आप पर निर्भर करता है कि आपको एक प्राप्त करना है या नहीं। कैसे भी हो,

कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत व्यवसाय शुरू करने का प्रमाण पत्र एक अनिवार्य कदम था । यह सार्वजनिक कंपनियों के लिए शेयर पूंजी के साथ अनिवार्य था। संयुक्त स्टॉक कंपनियों के रजिस्ट्रार द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

व्यवसाय शुरू करने का प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण था क्योंकि प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही आपको किसी भी व्यवसाय से संबंधित गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति दी गई थी। इससे पहले, आपको कंपनी पंजीकरण के साथ आने वाली किसी भी प्रकार की शक्तियों या लाभों का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी ।

प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए कदम

  • सबसे पहले, ई-फॉर्म 20 (एक घोषणा) फ़ाइल करें।
  • अपनी कंपनी के प्रॉस्पेक्टस में कथन संलग्न करें (एक कानूनी दस्तावेज जो आपके द्वारा लिखित उत्पाद को खरीदने पर सभी प्रतिभूतियों को जनता को प्रदान करता है)।
  • इसे रजिस्ट्रार के साथ दर्ज करें जिसके बाद एक सत्यापन होगा।
  • सफल सत्यापन के बाद, आपको व्यवसाय के प्रमाण पत्र के साथ जारी किया जाता है।

उपरोक्त दस्तावेजों को पंजीकृत करते समय आपको कुछ अन्य दस्तावेजों की भी आवश्यकता होगी;

  • पहचान और पता प्रमाण।
  • DSC (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट)।
  • पंजीकरण का प्रमाणपत्र (जो केवल गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के मामले में RBI द्वारा जारी किया जाता है)।
  • सभी निदेशकों (निदेशक घोषणा के साथ-साथ बोर्ड संकल्प) से एक सहमति पत्र।
  • ये सभी दस्तावेज निर्धारित शुल्क के साथ जमा किए जाते हैं।

व्यवसाय के प्रमाण पत्र के लिए आवेदन आम तौर पर कंपनी के निगमन के एक सौ अस्सी दिनों के भीतर लागू किया जाता है।

पहले, व्यवसाय शुरू करने के प्रमाण पत्र के बिना व्यापार करने के परिणाम थे, जिसमें कंपनी का पंजीकरण रद्द करने के साथ-साथ जुर्माना भी शामिल था। हालांकि, सत्ता में नए कंपनी अधिनियम, 2015 के साथ, ऐसे कोई परिणाम नहीं हैं। प्रमाण पत्र होना या न होना आपकी इच्छाशक्ति है। हम, LegalRaasta में, कंपनी के गठन के साथ इस प्रमाण पत्र को प्राप्त करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।

By LegalRaasta | 2021-06-30T16:33:36+05:30 January 30th, 2021 | Categories: business | Comments Off on व्यापार का प्रमाण पत्र

जब व्यापार करने के लिए नहीं

मुख्य आयुक्त के डेस्क से


व्‍यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के सरकार के एजेन्‍डा के अनुसार सभी हितधारकों को निरन्‍तर प्रोत्‍साहन देने एवं सहायता करने के लिए केन्‍द्रीय अप्रत्‍यक्ष कर एवं सीमाशुल्‍क बोर्ड के अधीन एक फील्‍ड संरचना के नाते दिल्‍ली सीमाशुल्‍क जोन वचनबद्ध है। लागू टैरिफ तथा व्‍यापार नीतियों के अनुसार न्‍याय संगत एवं पारदर्शी तरीके से राजस्‍व वसूली के लिए हम प्रयासरत हैं। हमारी कार्य योजना के हिस्‍से के रूप में, एक ओर हम व्‍यवसायियों को उनकी लागत प्रतिस्‍पर्द्धात्‍मकता को बढ़ाने, स्‍वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्‍साहित करने तथा परस्‍पर विश्‍वास का निर्माण करने में उनकी मदद करने का प्रयत्‍न करते हैं और वहीं दूसरी ओर शुल्‍क चोरी, वाणिज्यिक धोखाधड़ी तथा तस्‍करी गतिविधियों को रोकने के उपाय करने के लिए भी संघर्षरत हैं । पूर्ण संदेश यहां पढ़ें

मुख्‍य आयुक्‍त की डेस्‍क से –

व्‍यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के सरकार के एजेन्‍डा के अनुसार सभी हितधारकों को निरन्‍तर प्रोत्‍साहन देने एवं सहायता करने के लिए केन्‍द्रीय अप्रत्‍यक्ष कर एवं सीमाशुल्‍क बोर्ड के अधीन एक फील्‍ड संरचना के नाते दिल्‍ली सीमाशुल्‍क जोन वचनबद्ध है। लागू टैरिफ तथा व्‍यापार नीतियों के अनुसार न्‍याय संगत एवं पारदर्शी तरीके से राजस्‍व वसूली के लिए हम प्रयासरत हैं। हमारी कार्य योजना के हिस्‍से के रूप में, एक ओर हम व्‍यवसायियों को उनकी लागत प्रतिस्‍पर्द्धात्‍मकता को बढ़ाने, स्‍वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्‍साहित करने तथा परस्‍पर विश्‍वास का निर्माण करने में उनकी मदद करने का प्रयत्‍न करते हैं और वहीं दूसरी ओर शुल्‍क चोरी, वाणिज्यिक धोखाधड़ी तथा तस्‍करी गतिविधियों को रोकने के उपाय करने के लिए भी संघर्षरत हैं ।

आधुनिक जोखिम आधारित प्रबन्‍धन प्रणाली तथा गैर घुसपैठ जॉच तकनीक के प्रयोग के माध्‍यम से व्‍यापार सुविधा को बढा़ने की सरकार की समग्र नीति निर्देशों के हिस्‍से के रूप में सीमाशुल्‍क ड्यूटी संग्रहण, तस्‍करी एवं कर धोखाधड़ी की रोकथाम तथा सीमा नियंत्रण उपायों को लागू करने से संबंधित प्राथमिक कार्य को जोन में कार्यान्वित किया जा रहा है । आस्‍थगित शुल्‍क भुगतान, 24*7 निकासी, व्‍यापार सुविधा के लिए सिंगल विन्‍डो इन्‍टरफेस (स्विफ्ट) जैसे उपायों द्वारा कार्गो के प्रवास समय(ड्वेल टाइम) में कमी, निर्यात प्रक्रियाओं के सरलीकरण, ऑथराइज्‍ड इकोनोमिक आपरेटर्स(एईओ) योजना, बिल ऑफ एन्‍ट्री को अग्रिम दायर करना, कम डॉक्‍यूमेंटेशन तथा ई-संचित के माध्‍यम से दस्‍तावेजों को ऑन लाईन दायर करना और अन्‍य आधुनिक व्‍यापार प्रथाऍं आयात एवं निर्यात वस्‍तुओं की शीघ्र निकासी को सुगम बनाने के साधन के रूप में काम करते हैं। इसी प्रकार से, इंदिरा गॉधी अन्‍तर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा ,दिल्‍ली के आगमन एवं प्रस्‍थान टर्मिनल में यात्रियों एवं बैगेज की सीमाशुल्‍क निकासी को सुगम बनाने एवं विनियमित करने के लिए , हम अन्‍तर्राष्‍ट्रीय यात्रियों की पात्रता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म के उपयोग के साथ-साथ जोखिम आधारित यात्री प्रोफाईलिंग का अधिक से अधिक प्रयोग कर रहे हैं ।

व्‍यावसायिक कुशलता को विकसित करते हुए और दैनिक कार्य वातावरण में अधिक जब व्यापार करने के लिए नहीं जिम्‍मेदारी के भाव को बढ़ावा दे कर हम सर्विस डिलीवरी के उच्‍च मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। दिए गए कार्य को स्‍वतन्‍त्र एवं निष्‍पक्ष तरीके से ईमानदारी, पारदर्शिता एवं उद्देश्‍यपरकता के साथ जब व्यापार करने के लिए नहीं करने के लिए हम सतत रूप से प्रयत्‍नशील हैं। हमारे देश की भौगोलिक एवं आर्थिक सीमाओं की सुरक्षा करते हुए राष्‍ट्र निर्माण के प्रति समग्र जिम्‍मेदारी के हिस्‍से के रूप में हमारे अधिकारियों की वचनबद्ध एवं समर्पित टीम कर संग्रहण की सांविधिक भूमिका को निभाने एवं दूसरे सम्‍बद्ध कानूनों को लागू करते हुए व्‍यापारियों की समस्‍याओं का हल तलाशने के लिए सदैव तत्‍पर है।

हमारी कार्य प्रणाली में और अधिक सुधार के संबंध में किसी भी सुझाव का सदैव स्‍वागत है। आप ई-मेल के माध्‍यम से अथवा हमारे किसी कार्यालय में आ कर किसी कठिनाई अथवा शिकायत को हमारे ध्‍यान में ला सकते हैं ।

धोखाधड़ी से खुद को सुरक्षित रखें:

उदाहरणों में सूचनाएं आ चुकी हैं कि व्यक्तियों की संख्या टेलीफोन नंबरों के साथ-साथ ई-मेल और पत्र भी मिल रही है जिससे उन्हें व्यक्तिगत बैंक खातों में पैसा जमा करने के लिए कहा गया है कि कस्टम ऑफिसर ने उपहार पार्सल्स / पुरस्कारों को मंजूरी दे दी है, जब तक कि कोई भी कुछ शुल्क सीमा शुल्क, दंड आदि के लिए जमा किया जाता है और एक बैंक खाता नंबर भी दिया जाता है जहां धन जमा करना है।
एक अन्य सामान्य कार्यप्रणाली एक ई-मेल भेजती है कि यह बताता है कि प्राप्तकर्ता को एक पुरस्कार मिला है या पार्सल भेजा गया है और धन जमा करना है। ऐसे सभी कॉल / मेल जनता के साथ धोखाधड़ी का एकमात्र इरादा है।
सामान्य जनता को इसके द्वारा अधिसूचित किया जाता है और ऐसे फर्जी कॉल / मेलों का जवाब नहीं देने के लिए चेतावनी दी जाती है, क्योंकि कस्टम ऑफिसर टेलीफ़ोनिक कॉल नहीं करता है या व्यक्तिगत बैंक खातों में जमा राशि भेजने के लिए इस तरह की मेल भेजता है। इस संबंध में किसी भी तरह की धोखाधड़ी घटनाओं और शिकायतों के लिए किसी भी तरह से कस्टम डिपार्टमेंट जिम्मेदार नहीं है, यदि कोई हो, तो उसे पुलिस को बनाया जा सकता है।

डॉलर की जगह भारतीय रुपये में व्यापार करना चाहते हैं कई देश

भारत के रुपये में अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने की प्रक्रिया यानी डॉलर और अन्य बड़ी मुद्राओं की जगह रुपया इस्तेमाल करने का तरीका अन्य कई देशों को भा रहा है. दुनिया के कई देशों ने इस संबंध में भारत से संपर्क किया है.

ताजिकिस्तान, क्यूबा, लग्जमबर्ग और सूडान समेत कई देशों ने भारत से यह जानने के लिए बातचीत शुरू की है कि वह डॉलर या दूसरी बड़ी मुद्राओं को छोड़ भारतीय करंसी में अंतरराष्ट्रीय लेनदेन कैसे कर रहा है. समाचार एजेंस रॉयटर्स ने कम से कम दो आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. जब यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर रूस पर वित्तीय प्रतिबंध लगे थे, तब रूस और भारत ने इस प्रक्रिया से ही कारोबार शुरू किया था.

भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई में यह प्रक्रिया शुरू की थी. उद्योग जगत की एक हस्ती के हवाले से रॉयटर्स ने लिखा है कि अब भारत सरकार ऐसे देशों को भी इस प्रक्रिया के तहत लाने की कोशिश कर रही है जिनके पास डॉलर यानी अमेरिकी मुद्रा की कमी है. इस व्यक्ति ने अपना नाम प्रकाशित ना करने के आग्रह पर यह सूचना दी क्योंकि मामला अभी गोपनीय है. भारतीय वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने इस संबंध में पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दिए.

रॉयटर्स के देखे दस्तावेजों के मुताबिक कम से कम चार देशों ने भारत में रुपये में खाता खोलने में दिलचस्पी दिखाई है. इन खातों को वोस्तरो अकाउंट कहा जाता है. हालांकि भारत के बैंकों ने अभी उन देशों को ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई हैं. इन खातों को खोलने के लिए रिजर्व बैंक से इजाजत लेनी होती है.

कई और देश इच्छुक

मॉरिशस और श्रीलंका ने भी इस प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखाई है. उनके वोस्तरो खातों को तो रिजर्व बैंक ने मंजूरी भी दे दी है. दस्तावेजों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक ने 12 वोस्तरो खाते मंजूर किए हैं, जो रूस के साथ रुपये में कारोबार के लिए खोले गये हैं. छह अन्य खाते श्रीलंका और मॉरिशस के लिए हैं. इनमें से श्रीलंका के लिए पांच खाते हैं.

भारत कई अन्य बड़े व्यापारिक साझीदारों के साथ भी डॉलर की जगह रुपये में व्यापार करने की कोशिश कर रहा है. इनमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं जिनसे भारत बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है. एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक यूएई और भारत के केंद्रीय बैंक रुपया-दिरहम व्यापार व्यवस्था के लिए प्रक्रिया स्थापित करने पर बातचीत कर रहे हैं. सऊदी अरब के साथ रुपया-रियाल व्यापार प्रक्रिया की भी तैयारी की जा रही है.

अधिकारी के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब अपने निर्यात से मिलने वाले भारतीय रुपये को भारत में ही निवेश करने के तरीकों पर भी बातचीत कर रहे हैं. इस अधिकारी ने कहा, "हमने अतिरिक्त रुपयों को भारतीय बाजारों में निवेश करने का विकल्प पेश किया है.”

कैसे काम करती है व्यवस्था

इसी साल भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय मुद्रा में उपलब्ध किसी भी संपत्ति को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की इजाजत दे दी थी. आरबीआई ने मार्च में ही भारतीय व्यापारियों को रूस के साथ रुपये जब व्यापार करने के लिए नहीं में कारोबार करने की इजाजत दे दी थी. भारतीय मुद्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने से भारत को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी और वह उन देशों के साथ भी व्यापार कर सकता है जिन पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंध लगे हैं. मसलन, रूस से तेल खरीदने के लिए भारतीय व्यापारियों ने रुपये में भुगतान किया. इससे भारत कम दाम में तेल खरीद पाया.

इस व्यवस्था के तहत आयात और निर्यात करने वाले व्यापारी एक विशेष वोस्तरो खाता खोलते हैं, जो साझीदार देश के किसी बैंक के साथ जुड़ा होता है. वोस्तरो खाता साझीदार देश का बैंक भारत में किसी बैंक में खोलता है. व्यापारी को जितना भुगतान करना होता है, वह इस खाते में रुपयों में जमा कर देता है. उस रुपये को साझीदार देश किसी से भी रुपये में कारोबार करने में इस्तेमाल कर सकता है.

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